Ganga Nadi Par Lekh/Nibandh - Essay on River Ganga in Hindi

आज मैं आप लोगों को गंगा नदी पर लेख (Essay on Ganga River in Hindi) बताएंगे क्योंकि काफी बार आप लोगों को गंगा नदी पर लेख लिखने की आवश्यकता पड़ी होगी...हो सकता है कि आपको आपके एग्जाम में भी इसकी आवश्यकता हो।


इसलिए आप हमारे द्वारा बताए गए इसलिए को अच्छी तरह पर हैं और इसे आप अपने शब्दों में भी लिख सकते हैं। वैसे गंगा नदी हमारे देश का सबसे पवित्र नदी है इसलिए हमारा यह कर्तव्य बनता है कि हम इसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करें। - Ganga Nadi Par Nibandh


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Ganga Nadi Par Lekh - Essay on River Ganga in Hindi

Ganga Nadi Par Lekh


गंगा भारत की सबसे पवित्र नदी है। इसका जल अमृत के समान पवित्र माना जाता है। इसका जल विशिष्ट प्रकृति का है। इसमें कभी कोई कीड़ा पैदा नहीं होता।


किसी शीशी में बंद रखने पर कुछ दिनों के बाद अन्य नदियों का जल गंदा तथा दुर्गंधपूर्ण और हानिकारक कीटों से भर जाता है। 


पर, गंगा नदी का जल कभी गंदा और दुर्गंधपूर्ण नहीं होता, इसलिए हिंदुओं में गंगाजल का माहात्म्य है। प्राचीनकाल में गंगा की इस विशेषता से संसार के बहुत-सारे देश परिचित थे। 


सिकंदर जब भारत पर आक्रमण करने चला था तब उसके गुरु (अरस्तू) ने उससे गंगाजल लाने को कहा था। 


हिंदुओं का कोई धार्मिककृत्य गंगाजल के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। ऐसी मान्यता है कि मरते समय जिस हिंदू के मुख में गंगाजल डाल दिया जाता है, उसे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है।


गंगा को सुरसरिता, देवनदी, भागीरथी, मंदाकिनी आदि अनेक नामों से पुकारा जाता है। एक पौराणिक कथा है कि भगीरथ के प्रयास से गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर आई थी। इसलिए, इसे 'भागीरथी' कहते हैं।


गंगा की महिमा का वर्णन वेद-पुराणों में उपलब्ध है। आर्य सभ्यता के विकास में इस नदी का योगदान कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता।


प्राचीनकाल में इस नदी के पावन तट पर अनेक महान राज्यों की स्थापना हुई थी। इसके तट पर अनेक महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थल हैं। गंगा नदी के तटीय प्रदेश अत्यंत उपजाऊ हैं।


बिहार की राजधानी पटना  है। पटना गंगा के किनारे बसा है। पटना को प्राचीन-काल में पाटलिपुत्र या कुसुमपुर कहा जाता था। उत्तर प्रदेश का वाराणसी (बनारस) नगर गंगा के पवित्र तट पर बसा है। 


इलाहाबाद (प्रयाग) में गंगा, यमुना और अंतःसलिला सरस्वती नदियों का पवित्र संगम है। महाकुंभ के अवसर पर असंख्य श्रद्धालु यहाँ पवित्र स्नान करते हैं।


प्रदूषण के चलते गंगा का पवित्र जल अब दिनानुदिन दूषिंत होता जा रहा है। इसमें बड़े-बड़े शहरों की गंदगी बराबर गिरती रहती है। स्वर्गीय राजीव गाँधी (तत्कालीन प्रधानमंत्री) ने गंगा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए अनेक योजनाओं की घोषणा की थी।


पर, उनकी योजनाएँ राजनीतिक उठापटक एवं संकल्प-शक्ति के अभाव के चलते आज तक पूरी नहीं हो पाई हैं। 


गंगा को प्रदूषणमुक्त रखने का कार्य केवल सरकार का ही नहीं है, यह हमारा भी उत्तरदायित्व है की हम इसे प्रदूषण मुक्त रखने के लिए अपनी ओर से हरसंभव प्रयास करें। 


आप बिहार की राजधानी पटना आकर गंगा को देखें। गंगा महानगर से रूठकर कहीं-कहीं बहुत दूर चली गई है। घाटों पर नहाने के लिए स्वच्छ जल भी दुर्लभ हो गया है। 


पंद्रह-बीस वर्ष पूर्व जहाँ गंगा नदी में गर्मी के दिनों में भी स्टीमरें हंसिनी-सी तैरती रहती थी, वहाँ आज गर्मी के दिनों में गंगा की छाती पर रेत के द्वीप फफोलों की तरह उभरे हुए-से दिखाई पड़ते हैं। 


धिक्कार है, हमारी आज की सभ्यता को जिसने गंगा को इतना मलिन और कलंकित किया है! आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गंगा की सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है और अब यह देखना है कि सरकार इसमें कितनी सफलता प्राप्त करती है।


साथ ही, प्रत्येक नागरिक को गंगा की स्वच्छता के लिए भगीरथ प्रयत्न करने होंगे।


  • Total 500 Words



 

निस्कर्ष : आज हमने Ganga Nadi Par Lekh (Essay on Ganga River in Hindi) बताया। इस लेख से यह पता चलता है कि गंगा नदी को स्वच्छ रखना कितना जरूरी है। 


साथ ही साथ हमने ये भी जाना कि गंगा नदी को स्वच्छ रखने की जिम्मेवारी हमे खुद लेनी पड़ेगी। ये हमारा कर्तव्य है कि हम प्रकृति द्वारा देन इस धरोहर को संजो कर रखें।

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